शीला दीक्षित का एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. शनिवार दोपहर 3 बजकर 5 मिनट पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और 3 बजकर 55 मिनट पर उनका निधन हो गया.

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अब हमारे बीच नहीं रहीं. 81 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. लंबे समय से बीमार चल रही शीला दीक्षित का एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. लेकिन शनिवार दोपहर 3 बजकर 5 मिनट पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और 3 बजकर 55 मिनट पर उनका निधन हो गया.

शीला दीक्षित शुरू से ही कांग्रेस पार्टी से जुड़ी थीं और अपनी आखिरी सांस तक शीला दीक्षित कांग्रेस के लिए फिक्रमंद थीं. वहीं शीला दीक्षित का आखिरी संदेश भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए ही था. अपने आखिरी संदेश में शीला दीक्षित ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बीजेपी कार्यालय के लिए बाहर प्रदर्शन करने के लिए कहा था. अपने आखिरी संदेश में उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा था कि उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी और प्रदेश सरकार के बीच गतिरोध खत्म नहीं होता है तो वे बीजेपी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करें.

 

दरअसल, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जमीन विवाद में 10 लोगों की मौत हो गई. इस मामले के पीड़ितों से मिलने के लिए प्रियंका गांधी यूपी गई थीं. हालांकि, यूपी प्रशासन ने प्रियंका को पीड़ित परिवारों से मिलने से रोका और उन्हें हिरासत में ले लिया था. इसके बाद प्रियंका धरने पर बैठ गई थीं. इसी मुद्दे को लेकर शीला ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बीजेपी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करने के लिए कहा था.

शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली पूर्व दिल्ली सरकार में मंत्री रही किरण वालिया के मुताबिक, 'उन्होंने अपने आखिरी संदेश में कार्यकर्ताओं से बीजेपी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने को कहा था. वह प्रदर्शन करने के लिए मौजूद नहीं थीं. इसलिए उनकी जगह प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष हारुन यूसुफ को नेतृत्व करना था. शीला दीक्षित ने कहा था कि अगर यूपी सरकार और प्रियंका गांधी के बीच गतिरोध खत्म न हो तो कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करें.' किरण वालिया ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गतिरोध खत्म हो चुका है. अगर ऐसा नहीं होता तो बीजेपी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते.